नैनीताल में मां नंदा-सुनंदा महोत्सव की भव्य शुरुआत

नैनीताल, जिसे सरोवर नगरी भी कहा जाता है, में मां नंदा-सुनंदा महोत्सव ने 123वें वर्ष में प्रवेश किया है। इस उत्सव की शुरुआत धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई। पहले दिन, कदली वृक्षों का नगर भ्रमण किया गया, जो ज्योलिकोट के चोपड़ा गांव से विशेष रूप से लाए गए थे।
महिलाओं और बच्चों का पारंपरिक स्वागत
कदली वृक्षों के नैनीताल पहुंचने पर, स्थानीय महिलाएं और स्कूली बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में उनका स्वागत करने के लिए सड़कों पर उतरे। महिलाएं मंगलगीत गाते हुए और ढोल की थाप पर झूमते हुए वृक्षों का अभिनंदन करतीं दिखीं। पूरे शहर का वातावरण श्रद्धा और उल्लास से गूंज उठा।
भव्य शोभायात्रा
रामसेवक सभा के नेतृत्व में कदली वृक्षों की शोभायात्रा सुखताल, चीन बाबा और वैष्णो देवी मंदिर होते हुए मां नैना देवी मंदिर तक पहुंची। बच्चों ने रंग-बिरंगे परिधान और झांकियों से यात्रा को भव्य रूप दिया। श्रद्धालु पूरे मार्ग में “जय मां नंदा-सुनंदा” के नारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए।
प्रतिमा निर्माण की परंपरा और महत्व
इन कदली वृक्षों से मां नंदा और सुनंदा की प्रतिमाएं बनाई जाएंगी। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को बनाने में प्राकृतिक और इको-फ्रेंडली रंगों का उपयोग किया जाता है। प्रतिमा का चेहरा समय का संकेत देता है, अगर चेहरा प्रसन्न दिखे तो यह शुभ माना जाता है।
पौराणिक कथा और महोत्सव की मान्यता
महोत्सव की जड़ें एक पौराणिक कथा से जुड़ी हुई हैं, जिसमें मां नंदा और सुनंदा राक्षस से बचने के लिए एक पेड़ के पीछे छिप जाती हैं। इसी घटना की स्मृति में यह महोत्सव मनाया जाता है।
अष्टमी को खुलेगा प्रतिमाओं का पट
महोत्सव की सबसे खास कड़ी है अष्टमी, जब ब्रह्म मुहूर्त में प्रतिमाओं के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। इस दिन मां नंदा और सुनंदा धरती पर आती हैं और भक्तों से मिलती हैं। इस दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक
मां नंदा-सुनंदा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक है। यह आयोजन क्षेत्रीय व्यापार को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि दूर-दराज से लोग नैनीताल आते हैं और यह महोत्सव उनके जीवन का हिस्सा बन जाता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उत्साह
पहले ही दिन हजारों श्रद्धालु कदली वृक्षों के स्वागत और शोभायात्रा में शामिल हुए। स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए थे। नैनीताल का वातावरण भक्ति और उल्लास से भरपूर था।
आने वाले दिनों में धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम
आने वाले दिनों में महोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन संध्या आयोजित की जाएंगी। स्थानीय कलाकार अपने प्रदर्शन से इस महोत्सव को और भी भक्तिमय बनाएंगे।
मां नंदा-सुनंदा महोत्सव की सांस्कृतिक धरोहर
मां नंदा-सुनंदा महोत्सव नैनीताल की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का अद्वितीय उदाहरण है। यह महोत्सव धार्मिक आस्था, स्थानीय संस्कृति और समाज की एकता को मजबूत करता है। जैसे-जैसे महोत्सव की गतिविधियां आगे बढ़ेंगी, श्रद्धा और भक्ति का प्रवाह और गहरा होता जाएगा।

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