ED Raid पर सौरभ भारद्वाज का बड़ा खुलासा

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली राज्य संयोजक सौरभ भारद्वाज ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की कार्रवाई को फर्जी करार दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • छापेमारी पूरी तरह से राजनीतिक प्रेरित थी।
  • 19–20 घंटे चली रेड के बावजूद कुछ नहीं मिला।
  • ईडी ने उन्हें एक मनचाहा बयान लिखवाने का दबाव बनाया।

ईडी छापे की पूरी कहानी

  • ईडी की रेड के दौरान सौरभ भारद्वाज के घर से कोई आपत्तिजनक वस्तु या दस्तावेज नहीं मिले
  • उनके अनुसार, अधिकारियों ने उनके बयान में बदलाव करवाने की कोशिश की
  • जब उन्होंने मना किया, तो अधिकारियों ने पहले के पंचनामे को फाड़ दिया

ईडी को क्या मिला?

  1. चुनाव हलफनामा
    • चुनाव के समय सौरभ भारद्वाज ने जो हलफनामा चुनाव आयोग को दिया था, वही दस्तावेज ईडी को मिला।
    • खुद भारद्वाज ने यह डॉक्यूमेंट दिखाया, जब अधिकारियों ने उनसे PAN नंबर मांगा।
  2. दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल शपथपत्र (89 पन्नों का)
    • यह दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव द्वारा कोर्ट में दायर किया गया था।
    • यह एक पब्लिक रिकॉर्ड है, जिसे जब्ती में शामिल किया गया।

बयान से छेड़छाड़ का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने बताया:

  • जब उनका बयान रिकॉर्ड किया जा रहा था, तब ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर मयंक अरोड़ा ने वह बयान किसी और को दिखाया।
  • फिर वापस आकर उनसे कहा गया: “कुछ हिस्से हटा दीजिए, ये बाकी ठीक है।”
  • लेकिन उन्होंने मना कर दिया और बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

मांग की गई:

मयंक अरोड़ा के लैपटॉप और मेरे प्रिंटर की फोरेंसिक जांच होनी चाहिए। इसमें असली बयान मौजूद है।”

“मैं 9 मार्च 2023 को मंत्री बना” – भारद्वाज

  • उन्होंने कहा कि उन्होंने 22 मार्च को पहली बैठक की थी अस्पताल निर्माण की देरी को लेकर।
  • इसके बाद लगातार बैठकों में अधिकारियों को तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
  • उन्होंने ईडी को बताया कि “मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाई, मेरे खिलाफ साजिश की जा रही है।”

PMlA कानून पर सवाल

“PMlA की धारा 17 में कहा गया है कि जो व्यक्ति बयान देगा, उसी का बयान अदालत में उसके खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है।
पूरी दुनिया में ऐसा कहीं नहीं है, ये सिर्फ भारत में है।” – सौरभ भारद्वाज

उन्होंने यह भी कहा कि:

  • यदि मैं बयान में झूठ बोलता, तो मुझे जेल भेजा जा सकता है।
  • लेकिन यदि अधिकारियों ने बयान में हेरफेर की, तो उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

सियासी साजिश या जांच प्रक्रिया?

सौरभ भारद्वाज ने जो सबूत और विवरण पेश किए हैं, वो ये दिखाते हैं कि यह छापा जांच कम और राजनीति ज़्यादा दिखता है।
उनका दावा है कि उन्हें सिर्फ इसलिए फंसाया जा रहा है क्योंकि वह सत्ताधारी दल के खिलाफ हैं

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