हिमाचल बना देश का पहला ‘बायोचार राज्य’

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम

शिमला, 27 अगस्त 2025 — हिमाचल प्रदेश ने पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि हिमाचल भारत का पहला राज्य होगा, जहां सरकार की मदद से बायोचार परियोजना शुरू की जा रही है।

किसने किया समझौता?

शिमला स्थित ओक ओवर में तीन संस्थानों के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ:

  • डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय, नौनी
  • हिमाचल प्रदेश वन विभाग
  • प्रोक्लाइम सर्विसेज प्रा. लि., चेन्नई

पहला बायोचार प्लांट कहां और कब?

  • स्थान: नेरी, जिला हमीरपुर
  • शुरुआत: अगले 6 महीनों में
  • लक्ष्य: पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और स्थानीय बायोमास का उपयोग

बायोचार से क्या होगा फायदा?

जंगल की आग पर नियंत्रण

  • सूखी चीड़ की सुइयों, बांस और लैंटाना जैसी वनस्पति का उपयोग

रोज़गार और आय के अवसर

  • बायोमास इकट्ठा करने पर ₹2.50 प्रति किलो
  • सालाना 50,000 व्यक्ति-दिवस का रोजगार
  • संयंत्र में प्रत्यक्ष नौकरियां भी मिलेंगी

ग्रीनहाउस गैसों में कमी

  • कोयले का हरित विकल्प
  • कार्बन क्रेडिट: 10 साल में लगभग 28,800 क्रेडिट मिलेंगे

बायोचार क्या है?

बायोचार एक कार्बन-समृद्ध पदार्थ है, जो बायोमास को माइक्रोवेव पायरोलिसिस तकनीक से तैयार किया जाता है।

इसके उपयोग:

  • 🌾 मृदा सुधार
  • 🌿 धीमी गति से काम करने वाले उर्वरक
  • 💧 अपशिष्ट जल शोधन
  • 🏭 हरित ऊर्जा और कार्बन कैप्चर

किन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ?

परियोजना मुख्य रूप से इन जिलों पर केंद्रित है:

  • कांगड़ा
  • मंडी
  • हमीरपुर
  • चंबा
  • बिलासपुर
  • सोलन

इन क्षेत्रों में चीड़ के जंगल अधिक हैं।

निवेश और कौशल विकास

  • निवेश: प्रोक्लाइम कंपनी का $1 मिलियन (USD) निवेश
  • प्रशिक्षण: स्थानीय युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम
  • सहभागिता: स्थानीय समुदाय बायोमास संग्रह में सक्रिय भूमिका निभाएंगे

मुख्यमंत्री का संदेश

“यह सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि हिमाचल के हरित भविष्य की नींव है।”
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू

निष्कर्ष

हिमाचल की यह पहल:

  • पर्यावरण को संरक्षित करेगी
  • ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाएगी
  • और देश के अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनेगी।
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